बिहार सृजन का इतिहास बताएंगी पुस्तकें

पटना – बिहार के सृजन का शताब्दी वर्ष मनाया जा रहा है। यह आम लोगों के बीच जिज्ञासा का विषय हो सकता है कि प्राचीन भारत के इतिहास में बिहार प्रांत जैसी कोई चीज नहीं थी क्या? क्या इस प्रांत का अस्तित्व महज 100 वर्षो का है?

इतिहास में यह उल्लेख है कि अत्यंत प्राचीन काल में बिहार में चार राज्य प्रसिद्ध थे-वैशाली, विदेह, मगध और अंग। कहीं-कहीं करूष (शाहाबाद) और गया के कुछ राजाओं के नाम भी वर्णित हैं। वैसे बिहार के सृजन और इतिहास से संबंधी शोध में यह ऐतिहासिक तथ्य सामने आया है कि महाभारत में कौशिकीकच्छ नामक प्रदेश का उल्लेख है, जो कोसी नदी की घाटी में स्थित था। अंग राज्य के पूर्व संथाल परगना जिले में जंगल था। बिहार का दक्षिणी भाग, जिसे वर्तमान में झारखंड का छोटानागपुर कहते हैं, जंगलों से भरा था। इसके दक्षिण-पूर्वी भाग में वज्रभूमि थी, जिसका उल्लेख जैन साहित्य में भी है। इससे संबंधित शोध कार्य पर मंत्रिमंडलीय सचिवालय विभाग ने हाल में आधुनिक बिहार के सृजन का शताब्दी वर्ष नामक 36 पृष्ठों की एक पुस्तिका प्रकाशित भी की है, जो महज बिहार के सृजन का संक्षिप्त परिचय देती है।

बिहार सरकार की ओर इस प्रांत के सृजन से जुड़ी ऐतिहासिक तथ्यों एवं शोधों पर आधारित आधा दर्जन पुस्तकों का पहली बार प्रकाशन किया जा रहा है जो बिहार के सृजन का राज ऐतिहासिक परिपे्रक्ष्य में खोलेंगी। ये पुस्तकें इतिहास में छिपे कई ऐसे अनछुए पहलुओं से रूबरू कराएंगी, जो अबतक अज्ञात रहे हेंै।

आगामी 22 मार्च को शताब्दी वर्ष समारोह में सभी संबंधित पुस्तकों का लोकार्पण किया जाएगा। राज्य सरकार ने शोधपरक पुस्तकों के प्रकाशन की जिम्मेवारी बिहार राज्य अभिलेखागार निदेशालय को सौंपी है। निदेशालय के निदेशक डा. विजय कुमार के मुताबिक, बिहार के सृजन इतिहास संबंधी पुस्तकों पर अनुसंधान कार्य में सुप्रसिद्ध इतिहासकारों एवं विशेषज्ञों की टीम जुटी है। यह बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य है। वैसे कई पुस्तकें प्रेस में प्रकाशन के लिए भेजी जा चुकी हैं। एक-दो किताबों पर शोध कार्य अंतिम चरण में है।

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